टविटर की "महफिल" में "चाँद" पर लिखे कुछ शब्द

कहते हैं चाँद सुनता है आशिकों के किस्से बड़े प्यार से,  
इन बादलों से कह दो कि अब वो मेरे दुश्मन ना बनें
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सुनो, कल रात कहीं चाँद तुमसे मिलने तो ना आया था,
कह कर गया था कि चाँदनी के साथ मुलाकात तय है
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ऐ चाँद, किसी ने तुझे शीतल कहा, किसी को बस तेरे दाग़ ही नज़र आए,
इस सब के बाद भी तू अकेला है, तू तो बिल्कुल मेरे जैसा है
…………………..
रखा था जिस दिन कदम इन्सान ने चाँद की ज़मीन पर,
जाने क्यों उस दिन से चाँदनी में कुछ मिलावट सी है,
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किसी ने चाँद को तन्हा कहा, किसी ने चकोर को बेबस,
अब ये तुम ही कहो, दोनों में से बेदर्द कौन है?

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मैनें सुना था कि तुम्हारे माथे की बिंदी को किसी शायर ने चाँद कहा था,
पर इतने दिनों से अमावस की रात खत्म क्यों नहीं होती?
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तुम्हारा इन्तज़ार करते करते कल मैं चाँद से बातें कर रहा था,
जाने क्यों अचानक वो पिघलने सा लगा,
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चाँद है, चाँदनी है, रात भी शबनमी है,
नहीं हो तो बस तुम नहीं हो, और साँस मेरी थमी सी है,
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चाँद की मिसाल तो दे देते हैं सब लोग,
कोई ता-उम्र तन्हा रह के देखे और बताए कि जुदाई की आग को ठण्डा कैसे करते हैं

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‘आपकामित्र’ गुरनाम सिहं सोढी
३० सितम्बर, २०११

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5 thoughts on “टविटर की "महफिल" में "चाँद" पर लिखे कुछ शब्द

  1. सदा says:

    चांद का जिक्र और आपकी कलम दोनो ही बेहतरीन ।

  2. आसमां से जमीन तक चाँद छाया हुवा है … क्या बात है …

  3. Pallavi says:

    रखा था कदम इंसान ने जिस वक्त छान की ज़मीन पर उस दिन से चाँदनी में कुछ मिलावट सी है…. वाह!!! क्या बात है दिल छू गई आपकी यह रचना…. :)समय मिले कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है http://mhare-anubhav.blogspot.com/

  4. चाँद पर लिखा गया हर शेर दिल में उतर गया ….बहुत खूबचाँद की मिसाल तो दे देते हैं सब लोग,कोई ता-उम्र तन्हा रह के देखे और बताए कि जुदाई की आग को ठण्डा कैसे करते हैं……………बेहतरीन

  5. aap sab ka bahut bahut shukriya 🙂

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