एक छोटे बच्चे की हँसी हँसना चाहता हूँ…

मैं एक छोटे बच्चे की हँसी हँसना चाहता हूँ
उस मासूमियत को अपने चेहरे पर हमेशा रखना चाहता हूँ

ये बनावटी चेहरे, धोखे से भरी आँखों से खुद को आज़ाद करना चाहता हूँ
हर नफरत, हर दुश्मनी को बस एक मुस्कान से प्यार मे बदलना चाहता हूँ

कहीं इज्ज़त, कहीं पैसा तो कहीं दुनिया मे उड़ी हैं रातों की नीदें
इन सब चिन्ताओं को छोड़ एक बच्चे की तरह सोते हुए मुस्कुराना चाहता हूँ

सोचते थे कब बड़े होगें, अपने पैरों पर खड़े होगें
आज जब बड़े हो गए हैं, तो फिर से घुटनों के बल रेंगना चाहता हूँ

वो तोतली बोली, वो माँ की गोद मे सो जाना, पल मे नाराज़ होना और अगले ही पल मान जाना
फिर से उसी भोलेपन को अपने अन्दर लाना चाहता हूँ

अपनी गली मे पड़े उस मिट्टी के ढेर पर खेलना चाहता हूँ
इस शोर से दूर माँ के आँचल मे खो जाना चाहता हूँ

वो लुक्का छिप्पी के खेल हमेशा खेलना चाहता हूँ
हाँ, मै हमेशा एक बच्चा बना रहना चाहता हूँ

‘आपकामित्र’ गुरनाम सिहं सोढी
१९ मार्च, २००७

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16 thoughts on “एक छोटे बच्चे की हँसी हँसना चाहता हूँ…

  1. Yaar Bachche Mat Bane Raho !! Apne Andar Jo Bachcha Hai , Sachcha Hai Use Banaye Rakkho. Kush Raho Aabaad Raho

  2. The Myth says:

    Bahut badhiya likha hai saab…

  3. यही दुआ कर सकता हूँ कि आपकी यह दुआ क़ुबूल हो … आमीन !

  4. बहुत सुन्दर रचना।

  5. Pallavi says:

    काश हम बड़ों के लिए यह संभव हो पाता….सुंदर रचना शुभकामनायें समय मिले कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है

  6. हृदय के किसी कोने में बचपन का भोलापन सदा जीवित रहे!सुन्दर रचना!

  7. Sunil Kumar says:

    बचपन हमेशा किसी ना किसी रूप में रहना चाहिए , सुंदर रचना बधाई

  8. हम सभी अपना बचपन वापस चाहते हैं..काश ये संभव होता.सुन्दर अभिव्यक्ति.

  9. बढ़िया अभिव्यक्ति Gyan Darpan.

  10. काश ये हो पाता…. कौन नहीं चाहता फिर से वापस पाना बचपन का। सुंदर अभिव्‍यक्ति।

  11. aap sab ke in sarahna bhare shabdo ka bahut bahut dhanyawaad.. sach me har ek shabd mere utsah ko aur badha raha hai.. aapka aabhari rahunga 🙂

  12. बहुत उम्दा!!

  13. बहुत प्यारी सी कविता …

  14. khubsurat man ke bhav se likhi gayi kavita…..gaya waqt or bacpan kabhi lout ke nahi aa sakta par man ke bacche ko kabhi naa marne de tho…dil mei khushi bani rahti hai ….aabhar

  15. jijivisha says:

    beeta hua sab acha..bhavishaya bhi lagta khubsuratbas shikayat to aaj se hai

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