शी लवस मी, शी लवस मी नॉट

ये मन भी अजीब दीवाना है,
कोई नहीं है आस पास,
फिर भी किसी से बतियाता है,
बिना किसी के कुछ कहे,
जाने क्या कुछ सुन जाता है,

निसदिन किसी से बातें करना आदत है इसकी,
खुद के सवाल और अपने मुताबिक ही जवाब,
खुद ही कुछ लिखता हे,
और फिर खुद को सुना कर खुश हो जाता है,

बिना लव के लव स्टोरी लिखता है,
एक अक्स को अपनी प्रेयसी बताता है,
पहली मुलाकात भी बाकी है अभी,
और जीवन संग बिताना चाहता है,

दुनिया अपनी राह चल रही,
ये अपनी दुनिया बसाता है,
मुस्कुराता है, फिर हँसता है खुद पे,
यूँ ही कोई मीठा गीत गुनगुनाता है,

सोचता है कि क्या होता जो पहले मिले होते,
किसी गली के कोने, किसी स्कूल या कॉलेज में,
फिर झटक देता है ऐसे ख्याल अपने अंदर से,
पिछला सब छोड़ आगे का सोचने लगता है,

कहानी बुनता है कि जब वो मिलेगा उससे,
क्या कहेगा, क्या ना कहेगा,
डरता है कुछ पूछने से,
बस “she loves me, she loves me not” रटता रहता है

‘आपकामित्र’ गुरनाम सिहं सोढी
१४ जून, २०१२

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