आईये फिर तमाशा देखिये

आईये, आप भी तमाशा देखिये,
बहुत दिन हो गए थे ना,
कुछ रंगीन देखे हुए,
लीजिए, आपके लिए, आप सब के लिए,
एक लड़की की इज्ज़त उतारी जा रही है,
क्या कहा?
रोज़ की बात है?
अरे नहीं! आज रंग ही कुछ और है,
१:२० की रेशो है,
विडियो भी है,

ये देख कर आप अपनी गालियों का पिटारा खोल सकते हैं,
ब्लॉगर अपना ब्लॉग अपडेट कर सकते हैं,
मीडिया वाले एक घंटे के विशेष के २४ कार्यक्रम बना सकते हैं,
छुटभईये नेता सरकार की नपुसंकता को उछाल सकते हैं,
बाबा लोग लड़कियों के छोटे कपड़ों पर टिपण्णी कर सकते हैं,
पाश्चात्य सभ्यता को कोस सकते हैं,
आप FB, twitter पर इस बात को शेयर कर सकते हैं,
और तो और आप इस वीडियो को अकेले में देख करआँखें भी सेक सकते हैं,
सबके लिए कुछ न कुछ है.

क्या कहा?
हमें कुछ करना चाहिए?
अरे छोड़िये, क्या करेंगे आप और हम?
हम बुद्धिजीवी हैं,
इसके अलावा हम कुछ कर भी क्या सकते हैं?
हमारे अंदर गुस्सा तो हैं,
पर पानी के बुलबुले की तरह,
पानी- जिसमे बिल्कुल भी उबाल नहीं,

आज लंबा वाद विवाद होगा,
आरोप मढ़े जाएंगे,
लोगों पर, तमाशगीनो पर, पुलिस पर,
नेताओं पर, फिल्मो पर, माँ बाप पर,
और उस लड़की पर भी,
जो रात को दोस्त का जन्मदिन मानाने गयी थी,

और कल मेट्रो में हम अपनी सीट पर बैठे होंगे,
और किसी लड़की पर जब कोई
जान बूझ कर गिरेगा
तो कुछ लोग हँसेंगे,
और हम सोने का नाटक करेंगें,
और सोचेंगे कि क्या हो रहा है हिंदुस्तान में आज,
कोई कहीं पर सुरक्षित नहीं,
क्योंकि हम बुद्धिजीवी हैं,
बातें करते हैं,
कलम चलाते हैं,
और रोज़ कोई नया तमाशा देखते हैं,
तो आइये,  एक बार फिर ये तमाशा देखते हैं…

‘आपकामित्र’ गुरनाम सिंह सोढी
१३ जुलाई, २०१२

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14 thoughts on “आईये फिर तमाशा देखिये

  1. रचना says:

    bahut hi sahii likhaa haen gurnaam aapne

  2. dr.mahendrag says:

    हम तमाशा ही देखतें हैं ,करते कुछ नहीं,यदि हर बुद्धिजीवी संगठित होकर इसका विरोध करें तो शायद इनका होना दोहराना रुक जाये.आओ हम संकल्प लें,………

  3. dr.mahendrag says:

    यह भी तो देखिये जनाब ,की यादों की उम्र कितनी लम्बी होती है,शायद अपनी ज़िन्दगी से भी ज्यादा, और हर याद का एक अपना अलग अंदाज बहुत ही खूबसूरत कविता

  4. बस यही आशा है की हमारी यादों कि उम्र इतनी हो कि हम ये याद रख सकें कि जो अभी किसी और के साथ हो रहा है वो हमारे या हमारे अपनों के साथ भी हो सकता है.. और अगर आज हम इन्हें नहीं रोकेंगे तो कल कोई उन्हें भी नहीं रोकेगा….

  5. anshumala says:

    ना कुछ बदला है और बदलने वाला भी नहीं है हम सब बयान बहादुर टिप्पणी बहादुर बयानों टिप्पणियों से अपनी बहादुरी दिखायेंगे और आगे निकल जायेंगे | एक छोटे से ब्लॉग जगत में हम महिलाओ का अपमान नहीं रोक सकते है तो बाहर क्या कर सकते है |

  6. सही कहा अंशुमाला जी.. ये एक ऐसा आईना है जो हमे चिढाता रहता है और हम बस आखें चुरा कर रह जाते हैं… पर एक कदम मंज़िल से दूरी कम कर देता है… अपनी ज़िम्मेदारी हम पूरी करें तभी दूसरों से अपेक्षा कर सकते हैं…

  7. बहुत ही बढ़िया यथार्थ का आईना दिखती सार्थक पोस्ट

  8. धन्यवाद पल्लवी जी..

  9. राजन says:

    टी.वी. चैनलों पर इतना हंगामा देखा.और चैनल वाले सबको कोस रहे हैं वहाँ जमा भीड,पुलिस सरकार सबको.लेकिन थोडा बहुत लानत मलानत उन मीडियाकर्मियों को भी क्यों नहीं भेजते जो वहाँ उस समय मौजूद थे और लडकी को बचाने के बजाय घटना का वीडियो बना रहे थे? सिर्फ इसलिए कि ये इन्हीं की बिरादरी के हैं? पत्रकार का काम केवल खबरें देना नहीं होता बल्कि उसके कुछ सामाजिक सरोकार भी होते हैं लेकिन लगता है इनकी तो बाँछे खिल गई होगी ये सब देखकर कि आज तो अच्छा मसाला मिला.

  10. कहते हैं charity begins at home. इसलिए खुद को हम जागृत करें, तो सब जागृत हो जायेंगे…अगर वहाँ एक भी व्यक्ति आवाज़ उठता तो उसके पीछे लोग इस घटना को होने से रोक सकते थे.. पर बात है शुरुआत करने की.. सब लोग सोचते हैं कि हम क्यों करें.. इतने लोग खड़े हैं, वो भी तो रोक सकते हैं.. और बस तमाशा देखते रहते हैं…उम्मीद है कि इन लोगों को सज़ा मिले और हम लोगो को कुछ शर्म.. कि ऐसी घटनाओं को बर्दाश्त करना छोड़ इनके खिलाफ कदम उठाएं हम…

  11. राजन says:

    एक बाईक सवार व्यक्ति ने कोशिश की थी लेकिन उसका साथ देने कोई नहीं आया और उन लडकों ने उसे भी भगा दिया.बाद में लडकी को अगवा करने की कोशिश की गई जिसे पुलिस ने रोका.हम किसी डीजीपी के बयान की कितनी ही लानत मलानत करें पुलिस को कितना ही असंवेदनशील कहें लेकिन वो लोग भी हमारे ही समाज से आते हैं और फिर वो देख रहे हैं कि हम खुद ही एक दूसरे के प्रति जरा भी संवेदनशील नहीं हैं तो फिर वो लोग भी क्यों परवाह करें.

  12. सच में दुर्भाग्यपूर्ण

  13. शर्मनाक घटना पर लिखा गया सार्थक लेख ….

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