जब मैंने तुमसे कुछ ना कहा था

ख़्वाब बहुत खूबसूरत होते हैं,
पर हमे जल्दी होती है,
उन्हें सच में बदलने की,
और इस कोशिश में
हम तोड़ देते हैं उन्हें
कच्ची कलियों की तरह,
कच्चे घड़ों की तरह,
कच्ची फसल की तरह,
और फिर पछताते हैं,
कि वो ख्वाब कितना हसीन था,

जब मैंने तुमसे कुछ कहा ना था,
तो हर वक्त मन उछलता था
अपनी कल्पना पर,
तुम्हारी हर बात पर,
तुम्हारी हर मुस्कान पर,
ख्वाब और भी रंगीन हो जाते थे
आने वाले कल के,
मेरी कवितायों में तुम्हारी बातें थी,
पंक्तियाँ जो हमेशा हँसती-मुस्कुराती थी,
कोई जब तुम्हारी बात मुझसे पूछता था,
मेरी आखों में एक चमक सी आ जाती थी,
तुम भी सब समझती थी,
फिर भी सब छुपाती थी,

फिर यूँ हुआ कि
मैंने तुमसे सब कुछ कह दिया,
और मेरे ख्वाब तुमने अपनी ना से तोड़ दिए,
एक आईने की तरह,
अब फिर से ये तन्हाई है,
फिर मेरे अंदर एक अजीब सी मायूसी छाई है,
अब तुम बात भी करती हो तो भी लगता है
जैसे ताना दे रही हो,
कोई पूछता है मुझसे तुम्हारे बारे में
तो जैसे तुम ही मुझे चिढ़ा रही हो,
कि मैंने एक गलत ख्वाब देखा था,
जब लिखता हूँ कविता तुम पर,
तो सोचता हूँ कि क्या कोई हक है मुझे?
और लिखता भी हूँ तो
निकलते हैं ‘काश’ जैसे शब्द,
जो अधूरे हैं,
मेरी तरह,
तुम्हारी तरह,

कभी कभी लगता है कि
शायद मैंने भी किसी का दिल दुखाया हो,
जो आज ये हुआ,
फिर सोचता हूँ कि मेरी ही गलती है,
सब ठीक था,
जब तक मैंने तुमसे कुछ ना कहा था,
मेरे ख्वाब में मैं खुश था,
मैंने ही अपने ख़्वाब का अस्तित्व मिटा दिया,
काश कुछ और देर खामोश रह जाता…



‘आपकामित्र’ गुरनाम सिंह सोढी
२६ जुलाई, २०१२

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10 thoughts on “जब मैंने तुमसे कुछ ना कहा था

  1. Sunil Kumar says:

    मेरे ख्याल से सपने में जीने का मज़ा ही कुछ और हैं 🙂

  2. सोढ़ी जी ये 'काश' जैसे शब्दों से बाहर निकल आइये …..ज़िन्दगी आपके सामने पड़ी है …सुंदर रचना ….!!

  3. @सुनील जी : जी बिलकुल.. सपनो की दुनिया अपने मन मुताबिक जो होती है…@हीर जी : जी कोशिश जारी है 🙂

  4. आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल बृहस्पतिवार o9-08 -2012 को यहाँ भी है …. आज की नयी पुरानी हलचल में …. लंबे ब्रेक के बाद .

  5. expression says:

    बहुत खूबसूरत….."काश" ,,कभी कभी जीने का मकसद बन जाता है…अनु

  6. सपनों की दुनिया का अपना आनंद है…पर,हाँ टूटते हैं तो कष्ट भी बहुत देते हैं

  7. बस वाही नहीं होने देना है… काश को यादों की तरह रखना है मुझे.. मकसद की तरह नहीं..

  8. फिर यूँ हुआ किमैंने तुमसे सब कुछ कह दिया,और मेरे ख्वाब तुमने अपनी ना से तोड़ दिए,एक आईने की तरह,अब फिर से ये तन्हाई है,बहुत मार्मिक ….. ज़िंदगी है तो ख्वाब हैं और ख्वाब है तो उम्मीद है …

  9. मेरे शब्दों को सराहने का धन्यवाद संगीता जी 🙂

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