­­गज़ल – उन्हें याद करने का बहाना नहीं है

उन्हें याद करने का बहाना नहीं है,
उनकी गली में अब आना जाना नहीं है,

गली छोड़ी, शहर छोड़ा और छोड़ा है उनको,
हमारे घर का पता अब वो पुराना नहीं है,

उनकी खुशियों की खबर हमे अब ना होगी,
नसीब में हमारे अब मुस्कुराना नहीं है,

मेहमान थे वो या कि हम उनके दिल में,
गहराई में इसकी हमे अब जाना नहीं है,

दिल की बात दिल में ही रहेगी,
हाल-ए-दिल किसी को अब बताना नहीं है,

दुआओं का मगर रुख वही है अभी भी,
लेकिन घर में हमारे अब कोई बुतखाना नहीं है,

आखों में खुद ही मारे थे पानी के छींटे,
कोई ख्वाब इनमे अब बसाना नहीं है,

मोहोब्बत के तलबगार तो सब हैं ‘मित्र’
पर इतना आसान इसे निभाना नहीं है,

‘आपकामित्र’ गुरनाम सिंह सोढी
१० अगस्त, २०१२

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8 thoughts on “­­गज़ल – उन्हें याद करने का बहाना नहीं है

  1. Again Beautiful 🙂

  2. again thank you :))

  3. dr.mahendrag says:

    गली छोड़ी, शहर छोड़ा और छोड़ा है उनको,हमारे घर का पता अब वो पुराना नहीं है,उनकी खुशियों की खबर हमे अब ना होगी,नसीब में हमारे अब मुस्कुराना नहीं है,Bahut khoob,par aisi bhi kya ruswai,ki muskaran nahin hae,

  4. Reena Maurya says:

    लाजवाब..बहुत ही बेहतरीन गजल…:-)

  5. शुक्रिया रीना जी 🙂

  6. The Myth says:

    Waah sahab… badi khoobsurti se… badi saadgi se… kitni khoobsurat baat kahi hai…. enjoyed reading…

  7. 🙂 shukriya mithilesh ji 🙂

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