नदी हो तुम… किसी के लिए रुकना नहीं

नदी हो तुम,
किसी के लिए रुकना नहीं,
बहुत लोग रोकेंगे,
बहुत दिक्कतें आएँगी,
चलती रहना तुम,
किसी के लिए रुकना नहीं,
बच्चो का मुंडन होगा,
खुशी में थमना नहीं,
किसी का अस्थि विसर्जन होगा,
दुखी हो कहीं थकना नहीं,
दो प्रेमी भी मिलेंगे,
उनकी बातें सुनना नहीं,
तुमसे गर कोई कुछ पूछे तो,
दिल की बात कहना नहीं,
नदी हो तुम,
किसी के लिए रुकना नहीं,
पत्थरों से टकराओ तो,
दर्द तुम्हे भी होगा, उन्हें भी,
कहीं रास्ता बदल जाओ तो,
दुःख तुम्हे भी होगा, उन्हें भी,
ऊँचाई से गिरना भी होगा,
गिर कर संभलना भी होगा,
तुम किसी किनारे पे अटकना नहीं,
नदी हो तुम,
किसी के लिए रुकना नहीं,
जवानी में जोश होगा,
किसी की परवाह नहीं,
अधेढ़पन में होश होगा,
पर फिर वो प्रवाह नहीं,
एक परिवार  की तरह,
कोई धारा जुड़ेगी तुमसे
तो कोई तुमसे अलग हो जायेगी,
तुम किसी से कभी जुडना नहीं,
नदी हो तुम,
किसी के लए रुकना नहीं,
बहुत कुछ मिलेगा तुम्हे,
कुछ अच्छा
तो कुछ गन्दगी भी,
कुछ मनचाहा
तो कुछ अनचाहा भी,
रख लेना सब अपने पास,
पर किसी को अपना करना नहीं,
नदी हो तुम,
किसी के लिए रुकना नहीं,
वो समंदर तुम्हारी मंज़िल है,
उसमे मिल तुम खो जाओगी,
खुद को खोने का दुःख मत करना,
खुद खो कर अपने प्रिय को पाओगी,
अकेले जाना है वहाँ तुम्हे,
बाकी सब किनारे पर रह जायेगा,
अपनी हस्ती खोने से डरना नहीं,
नदी हो तुम,
कभी किसी के लिए रुकना नहीं

‘आपकामित्र’ गुरनाम सिंह सोढी
२३ अगस्त २०१२

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4 thoughts on “नदी हो तुम… किसी के लिए रुकना नहीं

  1. सदा says:

    नदी हो तुम,कभी किसी के लिए रुकना नहींबहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति

  2. सतत चलते रहना ….प्रवाह्मान रहना …सार्थक प्रस्तुति ….शुभकामनायें…

  3. धन्यवाद सदा जी 🙂

  4. धन्यवाद अनुपमा जी 🙂

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