खुशी की गज़ल

चलो आज कुछ अचछा सुनाते हैं,
चलो इस मायूसी को दूर भगाते हैं,

बहुत देर हुई नकली मुस्कान ओढ़े,
चलो आज आईने को हँसाते हैं,

शायद कोई दुकान हो तारों-सितारों की,
चलो इन आखों के लिए चमक लातें हैं,

बहुत वक्त से आया नहीं कोई मिलने,
चलो सबको अपनी याद दिलाते हैं,

नफरतें अकेला कर देती हैं सबको,
चलो इस नफरत को अकेला छोड़ जाते हैं,

कड़वी दवाओं की खुराक है हर रोज़,
चलो सबका मुंह मीठा कराते हैं,

क्यों नहीं लिखता खुशी की गज़लें कोई,
चलो खुशी के दो शेर कह आते हैं,

ख्वाहिशों के चलते ज़िंदगी पीछे रह गयी,
इस फासले को चलो धीरे धीरे घटाते हैं,

सोने चांदी का क्या करेगा कोई,
चलो सबकी खुशी की दुआ कर आते हैं,

किताब की सफ़ेद जिल्द चुभती है आखों में,
चलो फूलों से कह के इसमें कुछ रंग भर आते हैं,

बैठ के सोचने से क्या होगा हासिल ‘मित्र’
जो सोचा है चलो आज कर के दिखाते हैं…

‘आपकामित्र’ गुरनाम सिंह सोढी
२४ अगस्त, २०१२

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6 thoughts on “खुशी की गज़ल

  1. Bahut waqt se aaya nahi koi milne…chalo aaj sabko apni yaad dilate hai. Beautiful & true. Loved reading 🙂

  2. dr.mahendrag says:

    ख्वाहिशों के चलते ज़िंदगी पीछे रह गयी,इस फासले को चलो धीरे धीरे घटाते हैं,बहुत वक्त से आया नहीं कोई मिलने,चलो सबको अपनी याद दिलाते हैं,bahut khoob Sodhiji,KAHNA CHAHOONGA-BAHUT DIN HUE HAMEN BHI MUSKARAYE,CHALO AAP SANG HUM BHI MUSKARATE HAEN

  3. sarahne ke liye shukriya dr sahab 🙂

  4. बहुत वक्त से आया नहीं कोई मिलने,चलो सबको अपनी याद दिलाते हैं,सोने चांदी का क्या करेगा कोई,चलो सबकी खुशी की दुआ कर आते हैं,Bahut sundar abhivyakti.. bahut khushi mili padh kar.. cuteness and wisdom both .. – SKB

  5. dhanyawaad ji :)-GSS

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