हिन्दी दिवस

यह कविता मैंने आज से सात साल पहले लिखी थी…

आज के हिन्दी दिवस को मेरा शत शत नमन,
नमन उन सभी साहित्यकारों को जिन्होने इस भाषा के सौन्दर्य को और निखारा,
अपने शब्दों से जादू सा चलाने वाले उन कवियों को नमन,

नमन उस प्रकृति को, सूर्य को, चन्द्र को,
जो जाने कितने लेखों के, कवितायों के विषय बने,
किसी प्रेमी की भावनाओं का वर्णन करते उन फूलों को नमन,

किसी आँदोलन की आग भड़काने से लेकर
मु्र्दों मे जान फूकने वाले वीर रस के काव्य को नमन,
नमन उन प्रेम ग्रन्थों को, उन मार्मिक भावनाओं को नमन,

मेरे अन्दर मृत पड़ी भावनाओं के सागर मे मंथन करने वाले उस हिमालय को नमन,
मेरे शब्दों का विषपान करने वाले समाज और उसकी भावनाओं से
अमृतपान करने वाली पुण्य आत्माओं को नमन,

नमन मेरा तुझे ऐ मेरी लेखनी,
और फूल पत्तियों से बने इस हमसफर कागज़, तुझे भी मेरा नमन,

इस अलंकृत भाषा को मेरा शत शत नमन,

-नमनकर्ता
‘आपकामित्र’ गुरनाम सिहं सोढी

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2 thoughts on “हिन्दी दिवस

  1. बहुत सुन्दर भाव … हिंदी दिवस पर न सभी अलान्जारों को नमन जो इस भाषा की शोभा बने …

  2. धन्यवाद दिगंबर जी.. और आपको भी हिंदी दिवस कि शुभकामनाएं 🙂

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